जितेजी कदर कएर ला हरएक इन्सान के
मरलाक वाद कोनो कदर नै ठठरी बिनु प्राण के
सुखके साथी सब अत दुखके साथी केओ नै
कर्मपथपर चलैत रह कोस नै भगवान के
हैँसके जिनगी जिऽ ला भैया भविस्यके पता नै
कम नै होए दिह कहियो अए ठोरक मुस्कान के
इष्ट,मित्र,दोस्त,स्नेही बिसैर जेतो सब क्षणभरमे
पैसा,रुपैया,धन-दौलत किछो नै तोहर कामके
करिहा जे-जे मोन हेतो मुदा याद रखिह “मोहन”
गिर नै दिह कहियो अपन तु आत्मसम्मान के
मोहन महतो कोईरी









